मोबाइल से बदलेगी ग्रामीण भारत की तस्वीर! मगवास के बच्चों ने कैमरे से लिखनी शुरू की अपने सुनहरे भविष्य की कहानी
Total Views : 105
Zoom In Zoom Out Read Later Print

रिपोर्ट - बबलू वेद, झाड़ोल

सोमरंजन फाउंडेशन और वीवो राजस्थान की अनूठी पहल बनी ग्रामीण शिक्षा में नई क्रांति, 200 से अधिक विद्यार्थियों ने सीखी प्रोफेशनल मोबाइल फिल्ममेकिंग

उदयपुर/झाड़ोल, 26 जुलाई 2026।

जहां एक समय फिल्म निर्माण केवल बड़े शहरों और महंगे स्टूडियो तक सीमित माना जाता था, वहीं अब झाड़ोल तहसील के मगवास राजकीय विद्यालय के ग्रामीण बच्चों ने मोबाइल कैमरे को अपना नया "क्रिएटिव स्टूडियो" बना लिया है। सोमरंजन फाउंडेशन (उदयपुर) एवं वीवो राजस्थान (बुबुगाओ कम्युनिकेशन प्रा. लि.) के सीएसआर सहयोग से आयोजित 'फिल्म-इन-एजुकेशन स्किल डेवलपमेंट प्रोग्राम' ने ग्रामीण प्रतिभाओं को नई उड़ान देने का ऐतिहासिक कार्य किया है।

कार्यक्रम के दूसरे दिन विद्यालय परिसर रचनात्मक ऊर्जा, उत्साह और आधुनिक तकनीक के अद्भुत संगम का गवाह बना। कक्षा 6 से 12 तक के 200 से अधिक विद्यार्थियों ने मोबाइल फिल्ममेकिंग, अभिनय, कैमरा एंगल, स्टोरीटेलिंग और वीडियो प्रोडक्शन की व्यावहारिक बारीकियां सीखकर यह साबित कर दिया कि अवसर मिलने पर गांवों की प्रतिभा किसी से कम नहीं होती।

कार्यक्रम की सबसे बड़ी उपलब्धियां

200+ ग्रामीण विद्यार्थियों ने लिया प्रशिक्षण।

वीवो कैमरा फोन्स से आधुनिक मोबाइल फिल्ममेकिंग का व्यावहारिक अभ्यास।

प्रोफेशनल फिल्म निर्माता एवं अभिनेता नवीन शर्मा और मौलश्री की विशेषज्ञ टीम ने दिया प्रशिक्षण।

अभिनय, कैमरा फेसिंग, फ्रेमिंग, स्टोरी डेवलपमेंट और वीडियो शूटिंग की विशेष कार्यशालाएं।

डॉ. बेला मलिक के नेतृत्व में आनापान सति ध्यान एवं मेडिटेशन सत्र।

ग्रामीण युवाओं को डिजिटल कंटेंट क्रिएशन और भविष्य के रोजगार से जोड़ने की अनूठी पहल।

मोबाइल अब केवल फोन नहीं, बनेगा रोजगार का नया हथियार

कार्यक्रम का उद्देश्य केवल फिल्म बनाना सिखाना नहीं, बल्कि ग्रामीण विद्यार्थियों को डिजिटल युग के नए अवसरों से जोड़ना है। आज कंटेंट क्रिएशन, डिजिटल मीडिया और मोबाइल फिल्ममेकिंग तेजी से उभरते हुए करियर विकल्प हैं। ऐसे में यह प्रशिक्षण ग्रामीण युवाओं के लिए आत्मनिर्भरता और रोजगार की दिशा में मजबूत कदम माना जा रहा है।

विद्यालय परिवार ने जताया आभार

विद्यालय की प्राचार्या पूनम जागरोटिया एवं कार्यक्रम समन्वयक अंजली पोखरना ने सोमरंजन फाउंडेशन, वीवो राजस्थान तथा पूरी विशेषज्ञ टीम—विकास कुलश्रेष्ठ, मनीष जोशी, सुनाक्षी, दिव्यांश सहित सभी सहयोगियों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह पहल ग्रामीण बच्चों के आत्मविश्वास, रचनात्मकता और भविष्य को नई दिशा देने वाली साबित होगी।

"मगवास से निकलेगी अगली डिजिटल पीढ़ी"

मोबाइल अब केवल बातचीत का साधन नहीं, बल्कि ग्रामीण बच्चों के सपनों को साकार करने का सबसे बड़ा माध्यम बन रहा है। कैमरे के पीछे सीखा गया यह हुनर आने वाले वर्षों में इन्हीं बच्चों को फिल्म, मीडिया, डिजिटल कंटेंट और रचनात्मक उद्योगों की नई पहचान दिला सकता है।