एनपी न्यूज 24/ करण सिंह, उदयपुर
झाड़ोल-उदयपुर क्षेत्र में एक सराहनीय पहल सामने आई है, जहां कोलकाता से आए माइम कलाकार सुशांतो दास ने मूक अभिनय के माध्यम से एक प्रभावशाली नाटक तैयार किया है। यह नाटक जैविक खेती, बढ़ते पलायन और रासायनिक खेती के दुष्प्रभावों जैसे गंभीर विषयों को सामने लाता है। इसका मंचन झाड़ोल एवं उदयपुर के विभिन्न स्थानों पर किया जाएगा, जिसमें खेती विश्वविद्यालय के युवा साथियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया है।
नाटक की झलक एक ऐसे गांव से शुरू होती है जहां प्रकृति और किसान का गहरा रिश्ता दिखाई देता है। आगे कहानी में बदलाव आता है—नई खेती पद्धतियों और बाहरी हस्तक्षेप के कारण गांव का संतुलन बिगड़ने लगता है। इसके साथ ही जमीन, स्वास्थ्य और आजीविका से जुड़े सवाल खड़े होते हैं।
कहानी में आगे चलकर कुछ ऐसी परिस्थितियां बनती हैं जो गांव के भविष्य और वहां के युवाओं के जीवन को प्रभावित करती हैं। अंत में नाटक एक सोचने पर मजबूर करने वाला संदेश देता है, जो दर्शकों को प्रकृति, खेती और गांव के अस्तित्व पर पुनर्विचार करने के लिए प्रेरित करता है।
यह माइम नाटक बिना संवाद के भी समाज को गहरी बात समझाने की एक सशक्त कोशिश है।
