APK फाइलों के जाल में फंसा तो खाली हो सकता है बैंक खाता, राजस्थान पुलिस ने जारी की बड़ी साइबर चेतावनी
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रिपोर्ट - बबलू वेद, झाड़ोल

झाड़ोल। साइबर ठगी के बढ़ते मामलों के बीच राजस्थान पुलिस ने मोबाइल यूजर्स के लिए एक बेहद महत्वपूर्ण एडवाइजरी जारी कर आमजन को APK फाइलों के जरिए होने वाली साइबर धोखाधड़ी से सावधान किया है। पुलिस ने स्पष्ट किया है कि साइबर ठग अब केवल फोन कॉल या लिंक के जरिए ही नहीं, बल्कि भरोसेमंद सरकारी सेवा, बिजली बिल, आरटीओ चालान, KYC अपडेट, बैंक खाते, सिम बंद होने, सरकारी योजनाओं, लॉटरी और डिजिटल कार्ड जैसे बहानों से APK फाइल डाउनलोड करवाकर मोबाइल का नियंत्रण अपने हाथ में लेने की कोशिश कर रहे हैं।

जिला पुलिस अधीक्षक उदयपुर कार्यालय की ओर से 8 सितंबर 2026 को जारी प्रेस विज्ञप्ति में बताया गया कि साइबर अपराधी आमजन को फर्जी संदेश भेजकर APK फाइल डाउनलोड करने के लिए प्रेरित कर रहे हैं। मोबाइल में ऐसी संदिग्ध फाइल इंस्टॉल होते ही ठगों को डिवाइस का रिमोट एक्सेस मिल सकता है। इसके बाद मोबाइल में मौजूद महत्वपूर्ण जानकारी, बैंकिंग ऐप, यूपीआई और अन्य संवेदनशील डेटा का दुरुपयोग कर बैंक खाते से रकम उड़ाने तक की वारदात को अंजाम दिया जा सकता है।

एक मैसेज, एक APK और पूरा मोबाइल ठगों के कब्जे में!

पुलिस की एडवाइजरी के मुताबिक ठग सबसे पहले ऐसा संदेश भेजते हैं, जिससे व्यक्ति घबरा जाए या लालच में आ जाए। कभी बिजली या गैस कनेक्शन कटने की बात कही जाती है, तो कभी आरटीओ चालान, बैंक KYC, सिम बंद होने, लॉटरी जीतने अथवा सरकारी योजना का लाभ दिलाने के नाम पर संदेश भेजा जाता है। इसी संदेश के साथ APK फाइल या लिंक भेजकर उसे डाउनलोड करने के लिए कहा जाता है।

यहीं से साइबर ठगी का असली खेल शुरू होता है। APK फाइल डाउनलोड कर इंस्टॉल करते ही मोबाइल का नियंत्रण ठगों के पास जा सकता है। पुलिस ने चेताया है कि इसके जरिए बैंक खातों और यूपीआई से रकम निकाली जा सकती है तथा मोबाइल में मौजूद निजी जानकारी भी अपराधियों के हाथ लग सकती है।

साइबर ठगों के चार बड़े हथियार, जिनसे सावधान रहना जरूरी

फर्जी मैसेज के जरिए ठग बिजली/गैस कनेक्शन काटने, बैंक खाता या सिम बंद होने का डर दिखाने अथवा लॉटरी और कर्ज का लालच देने जैसी चाल चलते हैं। इसके बाद APK फाइल डाउनलोड करवाकर मोबाइल का रिमोट एक्सेस हासिल किया जाता है।

ठग रिमोट एक्सेस ऐप के माध्यम से फोन की स्क्रीन, कॉल लॉग, कॉन्टैक्ट और गैलरी जैसी जानकारियों तक पहुंच बनाने की कोशिश कर सकते हैं। इतना ही नहीं, ऑटोमेटेड OTP फॉरवर्डिंग के जरिए बैंक से संबंधित OTP भी अपराधियों तक पहुंच सकता है। वहीं फोन में मौजूद कॉन्टैक्ट्स को भी निशाना बनाकर परिचितों के नाम से झांसा देने वाले संदेश भेजे जा सकते हैं।

यानी मामला केवल एक व्यक्ति के बैंक खाते तक सीमित नहीं रहता, बल्कि एक संक्रमित मोबाइल से उसके संपर्क में मौजूद लोगों तक साइबर ठगी का जाल फैल सकता है।

राजस्थान पुलिस की सीधी चेतावनी—1930 पर तुरंत शिकायत करें

महानिदेशक पुलिस राजस्थान श्री राजीव कुमार शर्मा के निर्देशन में साइबर अपराधों पर अंकुश लगाने और आमजन को जागरूक करने के उद्देश्य से यह एडवाइजरी जारी की गई है। पुलिस ने अपील की है कि किसी भी अनजान व्यक्ति द्वारा भेजी गई APK फाइल डाउनलोड नहीं करें और संदिग्ध लिंक पर क्लिक करने से बचें।

पुलिस ने विशेष रूप से कहा है कि APK फाइल केवल आधिकारिक स्टोर से ही डाउनलोड करें। एंड्रॉयड मोबाइल में Install Unknown Apps विकल्प को हमेशा बंद यानी Disabled रखें। अनजान स्रोत से आए किसी भी ऐप को इंस्टॉल करने से बचें।

इसके साथ ही सोशल मीडिया, एसएमएस या व्हाट्सऐप के माध्यम से प्राप्त अनजान लिंक या APK फाइल को खोलने की बजाय उसे नजरअंदाज करना ही सुरक्षित है।

WhatsApp में भी रखें खास सावधानी

पुलिस ने व्हाट्सऐप यूजर्स को भी सावधान करते हुए Two-Step Verification एक्टिव रखने और Media Auto-Download बंद रखने की सलाह दी है। इससे संदिग्ध फोटो, वीडियो या अन्य फाइल अपने आप डाउनलोड होने से बच सकती हैं।

पुलिस ने यह भी स्पष्ट किया है कि कोई भी ऐप इंस्टॉल करते समय उसके द्वारा मांगी जा रही परमिशन पर ध्यान देना बेहद जरूरी है। जरूरत से ज्यादा अनुमति मांगने वाला संदिग्ध ऐप भविष्य में बड़ी परेशानी खड़ी कर सकता है।

e-Challan के नाम पर भी हो रही ठगी

आरटीओ चालान के नाम पर आने वाले संदेशों को लेकर भी पुलिस ने विशेष सावधानी बरतने को कहा है। वाहन चालान की जानकारी के लिए केवल भारत सरकार के आधिकारिक e-Challan पोर्टल का इस्तेमाल किया जाए। किसी अनजान व्यक्ति द्वारा भेजे गए लिंक या APK के माध्यम से चालान भरने की कोशिश भारी पड़ सकती है।

मोबाइल में संदिग्ध APK आ गई तो क्या करें?

पुलिस ने सलाह दी है कि यदि किसी संदिग्ध APK को डाउनलोड कर लिया है तो घबराने के बजाय तत्काल सतर्कता बरतें। संदिग्ध ऐप को हटाएं, जरूरी अकाउंट और बैंकिंग गतिविधियों की जांच करें तथा किसी भी वित्तीय नुकसान की आशंका होने पर तुरंत संबंधित बैंक को सूचित करें। फोन में सुरक्षा जांच के लिए विश्वसनीय सुरक्षा साधन का इस्तेमाल करें।

सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि साइबर ठगी होने का इंतजार न करें। यदि किसी व्यक्ति के साथ साइबर धोखाधड़ी हो गई है अथवा ठगी का प्रयास किया गया है, तो तत्काल राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर शिकायत दर्ज करानी चाहिए। साइबर अपराध पोर्टल के माध्यम से भी शिकायत की जा सकती है। पुलिस ने हेल्पडेस्क के लिए 9256001930 और 9257510100 नंबर भी जारी किए हैं।

ठगी से बचने का सबसे बड़ा मंत्र—डरें नहीं, APK डाउनलोड न करें

साइबर ठगों का सबसे बड़ा हथियार लोगों का डर और जल्दबाजी है। “अभी बिल नहीं भरा तो कनेक्शन कट जाएगा”, “चालान जमा नहीं किया तो कार्रवाई होगी”, “KYC अपडेट नहीं किया तो बैंक खाता बंद हो जाएगा” जैसे संदेश इसी रणनीति का हिस्सा हो सकते हैं।

ऐसे किसी भी संदेश पर तत्काल प्रतिक्रिया देने के बजाय पहले उसकी सत्यता जांचना जरूरी है। सरकारी विभाग, बैंक, आरटीओ या कोई प्रतिष्ठित संस्था यदि सेवा संबंधी सूचना देती है तो उसकी आधिकारिक वेबसाइट या आधिकारिक ऐप से ही सत्यापन करें।