12 दिवसीय अखंड अग्नि तपस्या में लीन संत, विश्व शांति और जनकल्याण का लिया संकल्प
Total Views : 147
Zoom In Zoom Out Read Later Print

रिपोर्ट - प्रवीण वेद (बबलू), झाड़ोल

फलासिया तहसील के कौलिधारी परि पुरणनाथ आश्रम में चल रही कठोर साधना, श्रद्धालुओं का उमड़ रहा सैलाब

उदयपुर जिले की फलासिया तहसील स्थित बिछीवाड़ा क्षेत्र के कौलिधारी परि पुरणनाथ महाराज आश्रम में 4 जून से 15 जून तक 12 दिवसीय अखंड अग्नि तपस्या का आयोजन किया जा रहा है। इस विशेष तप साधना में श्री श्री तुलसीगिरी जी महाराज (लोहार बावजी धूनी, ओड़ा आश्रम) एवं दादीगिरी माताराम कठोर तपस्या में लीन हैं।
संतों के अनुसार इस तपस्या का उद्देश्य सर्वजन कल्याण, विश्व शांति, धार्मिक जागरूकता, सामाजिक उन्नति तथा प्राकृतिक एवं आर्थिक संकटों से मानव समाज की रक्षा के लिए ईश्वर से प्रार्थना करना है। नागा संन्यासी एवं प्राचीन ऋषि परंपरा के अनुसार अग्नि तपस्या को अत्यंत कठिन साधना माना जाता है, जिसमें साधक लोकमंगल और धर्म स्थापना के लिए कठोर तप करते हैं।
संतों का कहना है कि युगों-युगों से चली आ रही यह परंपरा समाज में सकारात्मक ऊर्जा, धार्मिक चेतना और मानव कल्याण का संदेश देती है। अग्नि देवता की साक्षी में की जा रही इस तपस्या के दौरान श्रद्धालु बड़ी संख्या में आश्रम पहुंचकर दर्शन एवं आशीर्वाद प्राप्त कर रहे हैं।
तपस्वी संतों ने कहा कि “सत्यम् शिवम् सुंदरम्” की भावना से प्रेरित होकर यह साधना सभी के सुख, शांति, समृद्धि और कल्याण के लिए समर्पित है। तपस्या की पूर्णाहुति 15 जून को विशेष धार्मिक अनुष्ठानों के साथ होगी।
स्थान – कौलिधारी परि पुरणनाथ महाराज आश्रम, बिछीवाड़ा, फलासिया तहसील, उदयपुर।
तपस्वी संत – श्री श्री तुलसीगिरी जी महाराज (लोहार बावजी धूनी, ओड़ा आश्रम) एवं दादीगिरी माताराम।